धरती के स्वर्ग में चीनी बंदूके..!

चीन से ख़तरा / २

कश्मीर को हम धरती का स्वर्ग कहते हैं. उस कश्मीर को, जो आज हमारे कब्जे में हैं. लेकिन जो कश्मीर पाकिस्तान के कब्जे में हैं, उसकी खूबसूरती और भी ज्यादा हैं. गिलगिट और बाल्टिस्तान का यह प्रदेश वास्तव में धरती का स्वर्ग हैं..!

आज धरती के इस स्वर्ग में हजारों चीनी सैनिकों की आवाजाही देखने को मिलती हैं. ऐसा लगता हैं, मानो पाकिस्तान ने कश्मीर के इस हिस्से का नियंत्रण चीन को सौंप दिया हैं. चीन की दृष्टि से इस प्रदेश का सामरिक महत्व बहुत ज्यादा हैं. पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह को चीन ने तैयार किया हैं, और ग्वादर के रास्ते वह अपने सारे पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति करने जा रहा हैं. ऐसे में चीन से ग्वादर जाने वाला रास्ता गुजरता हैं, गिलगिट – बाल्टिस्तान से..!

इस क्षेत्र में बारह महीने चलने वाला एकमात्र राजमार्ग हैं – काराकोरम राजमार्ग. कभी ‘सिल्क रूट’ का हिस्सा रहे इस राजमार्ग की चौड़ाई अभी १० मीटर हैं. चीन उसे तीन गुना चौड़ा करना चाहता हैं – अर्थात तीस मीटर का राजमार्ग !

China in PoK - 3

चीन का पश्चिम राजमार्ग ‘ल्हासा – काशगर / शिनजियांग राजमार्ग’ हैं. यही आगे जाकर काराकोरम राजमार्ग से मिलता हैं. यह क्षेत्र इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं की इसके २५० किलोमीटर के दायरे में चीन, अफगानिस्तान, कजाकिस्तान, पाकिस्तान और भारत ये पांच देश आते हैं.

सीमा क्षेत्रों में, दुर्गम स्थानों में रास्ता बनाने के लिए हमारे देश में ‘बॉर्डर रोड आर्गेनाईजेशन’ (BRO) हैं. उसी प्रकार चीन की ‘पीपल्स लिबरेशन आर्मी’ (PLA) का निर्माण विभाग हैं. इस निर्माण विभाग के अंतर्गत हजारों की संख्या में चीनी सैनिक इस समय गिलगिट – बाल्टिस्तान में काराकोरम राजमार्ग को चौड़ा करने का काम कर रहे हैं.

PoK
इसकी योजना लगभग दस वर्ष पुरानी हैं. जून, २००६ में चीन के ‘एसेट्स सुपरविज़न एंड एडमिनिस्ट्रेशन कमीशन’ (ASAC) और पाकिस्तान की ‘नेशनल हाइवे अथॉरिटी’ के बीच एक एम् ओ यु हस्ताक्षरित हुआ, जिसके तहत चीन के शिनजियांग से पाकिस्तान के ग्वादर तक चौड़ा रास्ता बनाने की बात की गई थी. इसी के फॉलो-अप के रूप में तत्कालीन पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के जुलाई, २०१० के चीन दौरे के समय एक और समझौते पर हस्ताक्षर हुए. यह समझौता हुआ चीन की ‘चाइना रोड एंड ब्रिज कारपोरेशन’ (CRBC) के साथ. इसके तहत ‘काराकोरम हाईवे प्रोजेक्ट – फेज – २’ को क्लियर किया गया.

इन रास्तों के साथ ही अभी-अभी चीन की स्टेट काउंसिल ने गिलगिट – बाल्टिस्तान होते हुए लगभग छह सौ किलोमीटर के रेल लाइन की परियोजना घोषित की हैं. इस रेल लाइन के द्वारा पाकिस्तान के खैबर पख्तुनवाला क्षेत्र के आबोटाबाद जिले का हवेलियाँ शहर, ‘खुन्जेरर्ब पास’ से जुड़ जाएगा.

पिछले तीन महीनों से चीन ने इस क्षेत्र में अपनी गतिविधियाँ और तेज कर दी हैं. चीन की पी एल ए के सैनिक, गिलगिट – बाल्टिस्तान में डेरा डाल कर बैठे हैं. उन्होंने पाकिस्तानी आर्मी के गिलगिट क्षेत्र के मुख्यालय को अपने कब्जे में लेकर वहां से सारी सैन्य विषयक गतिविधियाँ प्रारंभ कर दी हैं.

Chinese army spotted in PoK

वहाँ चीन के सैनिकों की संख्या इतनी ज्यादा हैं, की भारतीय सीमा से भी वे सहज रूप से दिख जाते हैं. दिनांक १३ मार्च को सारे भारतीय समाचार जगत ने खबरे दी की चीनी सैनिकों का बड़ा जमावड़ा ‘गुलाम कश्मीर’ में दिख रहा हैं. अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने भी इसे गंभीरता से लिया हैं. बीते रविवार को (अर्थात २० मार्च को) लन्दन से प्रकाशित ‘सन्डे गार्डियन’ ने ‘गुलाम कश्मीर’ में चीन की इस दमदार उपस्थिति पर एक बड़ी स्टोरी की हैं. उसके एक हफ्ते पहले, ‘न्यूयार्क टाइम्स’ ने भी इस पर बहुत कुछ लिखा हैं.

भारत की दृष्टि से यह अत्यंत चिंताजनक हैं. पाकिस्तान ने पैसों के और सैन्य सहायता के बदले में, मानो पूरा गिलगिट – बाल्टिस्तान, चीन को सौंप दिया हैं.

अत्यंत सामरिक महत्व के इस क्षेत्र में, धरती के असली स्वर्ग में, चीन के लाल सैनिकों की तोपे / बंदूके भारत के लिए एक बड़ा सरदर्द हैं..!!
– प्रशांत पोल

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Author: प्रशांत पोळ

I am an Engineer by profession. Consultant in Telecom and IT. Interested in Indology, Arts, Literature, Politics and many more. Nationalistic views. Hindutva is my core ideology.

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