अब कहा हो बरखा दत्त आप..?

अब कहा हो बरखा दत्त आप..?

प्रशांत पोल

मुझे नहीं मालूम आप चैतन्य कुंटे (Chyetanya Kunte ) को जानते हैं या नहीं. इसी नाम के एक शास्त्रीय संगीत के गायक महाराष्ट्र में प्रसिद्ध हैं. किन्तु मै जिस चैतन्य कुंटे का नाम ले रहा हूँ, वह बिलकुल अलग हैं. आय. टी. के क्षेत्र का एक नौजवान! प्रचार / प्रसार से कोसो दूर. लेकिन अपने आप को अभिव्यक्त करनेका माध्यम उसे ‘ब्लोग्स’ में दिखा. वह ‘ब्लोगर’ बन गया. अच्छा लिखता था तो कुछ पढ़ने वाले भी मिल गए.

फिर सन २००८ में २६/११ का आतंकवादी हमला हुआ. देश का सारा मीडिया मुंबई के ताज होटल के सामने डटा था. उनमे शामिल थी, इलेक्ट्रोनिकी पत्रकारिता की मूर्धन्य हस्ती, बरखा दत्त. बरखा वरिष्ठ पत्रकार हैं. भारत के राष्ट्रपति द्वारा ‘पद्मश्री’ अलंकरण से सम्मानित हैं. किन्तु बरखा जो रिपोर्टिंग कर रही थी वह देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण थी. ताज और ओबेराय (ट्रायडेंट) में घुसे आतंकवादियोंको  उनके आका पाकिस्तान से हमारे न्यूज़ चेनल देखकर निर्देश दे रहे थे, यह तो अब पूर्ण स्पष्ट हो गया हैं. बरखा दत्त, अपने रिपोर्टिंग से उन आकाओंको अनजाने में ही सही, पर भरी पूरी मदद कर रही थी.

बरखा दत्त - १

ओबेराय और ताज के सामने खड़े लोगोंमे यह सन्देश फैला था की ओबेराय में अब मेहमान नहीं बचे हैं. बरखा दत्त ओबेराय के जनरल मैनेजर को फोन-इन पर लेती है, और प्रश्न पूछती हैं, “ओबेराय में अभी और कितने मेहमान (यात्री) हैं?” जनरल मैनेजर सहमा सहमा जवाब देता हैं, “सौ के लगभग तो होंगे”. बरखा दत्त बड़े नाटकीय अंदाज के साथ ‘ब्रेकिंग न्यूज़’ देती हैं – “ओबेराय में अभी भी सौ से भी ज्यादा यात्री फंसे…!”

सारे देश में यह समाचार जाता हैं. एन डी टी वी के माध्यम से पाक में भी यह समाचार पहुचता हैं. और आधे – एक घंटे बाद ओबेराय में आतंकवादीयों द्वारा अंधाधुंध गोलीबारी चालू होती है !

वहा होलेंड में बैठा हुआ एक सामान्य सा ब्लोगर, चैतन्य कुंटे, बेचैन होता हैं. उसके मन में प्रश्न उठता हैं, “यह कैसी पत्रकारिता? देश को खोखला करने वाले आतंकियो को मदद करे ऐसी पत्रकारिता किस काम की?”

अपने मन की व्यथा चैतन्य कुंटे अपने ब्लॉग में उतारता हैं. “शोडी जर्नलिज्म” शीर्षक से यह सारी बाते चैतन्य अपने ब्लॉग में लिखता हैं. सारे सबुतोंके साथ, ‘बरखा दत्त ने रिपोर्टिंग के माध्यम से देश के साथ कैसा छलावा किया है’ यह लिखता हैं. भारतीय टी व्ही पत्रकारिता की अनभिषिक्त सम्राज्ञी, महारानी बरखा दत्त पर होलेंड में बैठा हुआ एक सामान्य भारतीय ब्लोगर, सबुतोंके साथ आक्रमण करता हैं..!!

और इस सामान्य ब्लोगर ने की हुई चोट, एन डी टी वी और बरखा दत्त को गहरी बैठती हैं! बरखा दत्त तिलमिला उठती हैं. ३ जनवरी, २००९ को वह अपने फेसबुक पर लिखती हैं –

“और आप जानना चाहते होंगे, इस ई-मेल का लेखक कौन हैं? हैं कोई एक श्रीमान कुंटे, जो होलेंड में रहते हैं. उनके उपर हमने क़ानूनी कारवाई प्रारंभ की हैं.”

बरखा दत्त आगे लिखती हैं – “ कोई भी ऐरा गैरा आदमी कंप्यूटर के सामने बैठकर कुछ भी लिखेगा? कुडा करकट लिखेगा..? इन्टरनेट पर मिलने वाली स्वतन्त्रता का अर्थ यह नहीं की आप कुछ भी लिखे! हम कुंटे के खिलाफ जबरदस्त कारवाई करने जा रहे हैं.”

बरखा दत्त और एन डी टी वी द्वारा चैतन्य कुंटे को क़ानूनी नोटिस थमाया गया. उसे धमकी दी गयी और माफ़ी न मांगने पर लंबी – चौड़ी रकम की नुकसान भरपाई का दावा ठोका गया. चैतन्य कुंटे एक सामान्य सा ब्लोगर था. आय टी के क्षेत्र में काम कर रहा था. एन डी टी वी जैसे बड़े समूह के साथ पंगा लेना उसके बस की बात नहीं थी.

चैतन्य कुंटे ने अपने ब्लोग मे एन डी टी वी से माफी मांगी. अपना पोस्ट वापस लिया (डीलिट किया) और प्रकरण को समाप्त किया.

लगभग दो वर्ष होते आये हैं इस घटना को. एन डी टी वी के दवाब के कारण चैतन्य कुंटे का ब्लॉग बंद हो गया. उसने अपने आप को इन्टरनेट की दुनिया से मानो अलग कर लिया. आज फेसबुक / ट्वीटर, कही भी चैतन्य कुंटे नहीं हैं. वह एक अनाम जिंदगी जी रहा हैं.

बरखा दत्त - २

लेकिन इस घटना के विरोध में ब्लोगर्स बड़ी संख्या में एकजुट हुए. अनेक ब्लॉग इसके खिलाफ लिखे गए. ‘चैतन्य कुंटे विरूद्ध बरखा दत्त’ इस नामसे स्टोरी इन्टरनेट पर डेवलप होती गयी. बरखा दत्त और एन डी टी वी का बहिष्कार करने, इन्टरनेट पर मुहीम भी चली. किन्तु मुख्य धारा की पत्रकारिता इस मामले मे लगभग चुप्पी साध गयी.

आज दो वर्ष के बाद हालत बहुत बदले हैं. देश के प्रमुख औद्योगिक घरानोंकी दलाल, निरा राडिया के साथ एन डी टी वी की बरखा दत्त और हिंदुस्तान टाईम्स के संपादक वीर संघवी ने जिस प्रकार से बिचौलियोंकी भूमिका निभायी हैं, वह सबके सामने हैं.

सबसे पहले ‘ओपन मैगज़ीन’ ने इन्टरनेट पर इस विषय को उठाया. यह मामला सिर्फ लेख लिखने तक सीमीत नहीं था. इस बार तो ‘ओपन मैगज़ीन’ ने निरा राडिया और बरखा दत्त के बीच चले संभाषण के टेप जारी किये. अनेक ब्लोगर्स ने इसे हाथोहाथ लिया. बरखा दत्त के टेप्स इन्टरनेट के अनेक ब्लोग्स में और साईट्स में चलने लगे. अब तो ‘आउटलुक’ ने भी बरखा दत्त का पर्दाफाश किया हैं. अंगरेजी आउटलुक के २९ नवंबर के अंक में २ जी घोटाला और निरा राडिया के टेप्स पर आवरण कथा की गयी हैं. इसमें बरखा दत्त के संभाषण को प्रमुखता से लिया गया हैं. आउटलुक साप्ताहिक स्पष्ट रूप से कहता हैं, की संभाषणोंसे यह पता चलता हैं, की कैसे बरखा दत्त और वीर संघवी ने (बाद में दूरसंचार मंत्री बने) राजा के लिए लोबिईंग की. उपर से तुर्रा यह की बरखा दत्त का कहना है की ‘इसे लोबिईंग कहना ठीक नहीं है. मैं तो केवल अपने पत्रकारिता का धर्म निभा रही थी!’

एक करोड सत्तर लाख का घोटाला करने वाले राजा को फिर से उसी दूरसंचार मंत्रालय में बिठाने के लिए बिचौलिए का काम करना यह बरखा दत्त का ‘पत्रकारिता धर्म’ हैं..!!

दो वर्ष पहले, पत्रकारिता में नैतिकता का दंभ भरने वाली ‘पद्मश्री’ बरखा दत्त ने अपने और एन डी टी वी के प्रभाव से चैतन्य कुंटे नामक एक सामान्य से ब्लोगर को चुप करा दिया था. और अब..? क्या अब बरखा दत्त ‘ओपन मैगज़ीन’ और ‘आउटलुक’ आदि अनेक पत्रिकाओंको क़ानूनी नोटिस देंगी?

एक सामान्य से ब्लोगर का गला घोटनेवाली बरखा दत्त अब इन पत्रिकाओं पर क्या कार्यवाही करती हैं, इसका हम सभी को बेसब्री से इंतज़ार हैं.

 प्रशांत पोल 

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Author: प्रशांत पोळ

I am an Engineer by profession. Consultant in Telecom and IT. Interested in Indology, Arts, Literature, Politics and many more. Nationalistic views. Hindutva is my core ideology.

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